मनोज कुमार, जिनका असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था, हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने देशभक्ति को परदे पर एक नई पहचान दी। उनका जन्म 24 जुलाई 1937 को एबटाबाद, ब्रिटिश इंडिया (अब पाकिस्तान में) हुआ था। फिल्मी दुनिया में उन्हें "भारत कुमार" के नाम से जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने अधिकतर फिल्मों में ऐसे किरदार निभाए जो देशप्रेम, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण की भावना से भरपूर थे। उनकी कुछ सबसे चर्चित और देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्में हैं: शहीद (1965) – भगत सिंह के रूप में दमदार अभिनय उपकार (1967) – "जय जवान जय किसान" का नारा देने वाली फिल्म पूरब और पश्चिम (1970) – भारतीय संस्कृति बनाम पश्चिमी सभ्यता रोटी, कपड़ा और मकान (1974) – आम आदमी की मूलभूत जरूरतों पर आधारित क्रांति (1981) – स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित ऐतिहासिक फिल्म सम्मान और उपलब्धियां: पद्म श्री (1992) – भारत सरकार द्वारा दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2015) – भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान मनोज कुमार न सिर्फ एक अभिनेता थे, बल्कि एक विचार थे – जो हर भारतीय के दिल में देशभक्त...
Good looking faces always attract people. It causes embarrassment most of the times mostly in parties . Realised and avoided parties where alcohol is served. All people don’t go for Dowry . I guess good looks compensate dowry . Love is not sex always. Caring and understanding attitude is the secret ingredient of successful marriage. Individuality matters a lot for self esteem. People should know your name , not as a wife of someone. Self independence is absolutely necessary for personal growth. It gives emotional security and respect in the Society. People ask those for help who are in a position to help . I feel happy that I have helped some needy ones in getting jobs. Parents are biased to their children. Even though I am close to them I can feel for others. Friends don’t remain friend if you are more successful than them . Now , even if I introduce myself to some of my school friends they can’t recognise me . It hurts the most. I have regretted for some of my decisions i...