मनोज कुमार, जिनका असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था, हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने देशभक्ति को परदे पर एक नई पहचान दी। उनका जन्म 24 जुलाई 1937 को एबटाबाद, ब्रिटिश इंडिया (अब पाकिस्तान में) हुआ था। फिल्मी दुनिया में उन्हें "भारत कुमार" के नाम से जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने अधिकतर फिल्मों में ऐसे किरदार निभाए जो देशप्रेम, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण की भावना से भरपूर थे। उनकी कुछ सबसे चर्चित और देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्में हैं: शहीद (1965) – भगत सिंह के रूप में दमदार अभिनय उपकार (1967) – "जय जवान जय किसान" का नारा देने वाली फिल्म पूरब और पश्चिम (1970) – भारतीय संस्कृति बनाम पश्चिमी सभ्यता रोटी, कपड़ा और मकान (1974) – आम आदमी की मूलभूत जरूरतों पर आधारित क्रांति (1981) – स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित ऐतिहासिक फिल्म सम्मान और उपलब्धियां: पद्म श्री (1992) – भारत सरकार द्वारा दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2015) – भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान मनोज कुमार न सिर्फ एक अभिनेता थे, बल्कि एक विचार थे – जो हर भारतीय के दिल में देशभक्त...
शीतकालीन ऋतू में हमे ऐसे खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जो ठंड के दिनों में खाने में गर्माहट और आराम तो देते ही हों, लेकिन शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करते हों। सर्दियों में अदरक, तिल, घी, अलग अलग प्रकार के साग, मेवे, केसर, शहद, गुड़, खजूर, खस-खस, मौसमी फल सब्ज़ियां, लहसुन, अनेक प्रकार के दालें, दुग्ध पदार्थ (गर्म ), तुलसी इत्यादि का सेवन करना स्वास्थ के लिए अति लाभकारी होता है। सर्दियों में ऐसे खाद्य पदार्थ जिनकी प्रकृति ठंडी होती है (जैसे आइसक्रीम , कोल्ड ड्रिंक्स, कच्ची सब्ज़ियां इत्यादि ) उनसे बचना चाहिए। सर्दियों में अंडे-मांस के सेवन को भी बेहतरीन मन जाता है। चूँकि मैं स्वयं शाकाहारी हूँ इसीलिए मुझे इन खाद्य पदार्थों के बारे में कुछ खास जानकारी तो नहीं है, पर मैं यकीन से कह सकती हूँ कि शाकाहार में भी अनेकोनेक लाभकारी और पोषक तत्वों से भरपूर ढेर सारे खाद्य पदार्थ हैं जिनका सही तरह से सेवन कर के बेहद स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। उम्मीद करती हूँ आप सभी को यह जवाब पसंद आया होगा। (सर्दियाँ मेरा पसंदीदा मौसम है और मुझे गाजर के हलवे का साल भर इंतज़ार रहता है।)